टेंशन दूर करने के लिए कौन सा योग करें?HealthPlanet

Posted on Tue 13th Dec 2022 : 16:11

5 योगासन, जिनसे दूर हो सकती है टेंशन / स्ट्रेस की समस्या :-

1. बालासन (Balasana / Child Pose)

बालासन, शरीर को उसी स्थिति में ले जाता है, जिस स्थिति में माता के गर्भ में होता है। मां के गर्भ में रहकर बच्चा जिस स्थिति में 9 महीने तक जन्म लेने का इंतजार करता है। बालासन करते हुए योगी शरीर को उसी स्थिति में ले जाता है।

इस आसन का अभ्यास पूरी तरह से गुरुत्व बल के विपरीत शरीर से जोर लगाते हुए किया जाए तो, कोई भी आसानी से मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक राहत पा सकता है।

बालासन, साधारण कठिनाई या बेसिक लेवल का आसन है। इसे विन्यास योग की शैली का आसन माना जाता है। बालासन का अभ्यास 1 से 3 मिनट तक किया जाना चाहिए। इसे करने में किसी किस्म के दोहराव की आवश्यकता नहीं होती है।

बालासन करने की विधि :

योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
दोनों टखनों और एड़ियों को आपस में छुआएं।
धीरे-धीरे अपने घुटनों को बाहर की तरफ जितना हो सके फैलाएं।
गहरी सांस खींचकर आगे की तरफ झुकें।
पेट को दोनों जांघों के बीच ले जाएं और सांस छोड़ दें।
कमर के पीछे के हिस्से में त्रिकास्थि/सैक्रम (sacrum) को चौड़ा करें।
अब कूल्हे को सिकोड़ते हुए नाभि की तरफ खींचने की कोशिश करें।
इनर थाइज या भीतर जांघों पर स्थिर हो जाएं।
सिर को गर्दन के थोड़ा पीछे से उठाने की कोशिश करें।
टेलबोन को पेल्विस की तरफ खींचने की कोशिश करें।
हाथों को सामने की तरफ लाएं और उन्हें अपने सामने रख लें।
दोनों हाथ घुटनों की सीध में ही रहेंगे।
दोनों कंधों को फर्श से छुआने की कोशिश करें।
आपके कंधों का खिंचाव शोल्डर ब्लेड से पूरी पीठ में महसूस होना चाहिए।
इसी स्थिति में 30 सेकेंड से लेकर कुछ मिनट तक बने रहें।
धीरे-धीरे फ्रंट टोरसो को खींचते हुए सांस लें।
पेल्विस को नीचे झुकाते हुए टेल बोन को उठाएं और सामान्य हो जाएं।

2. सुखासन (Sukhasana / Easy Pose)

सुखासन को किसी भी उम्र और लेवल के योगी कर सकते हैं। बैठकर किया जाने वाला सुखासन सरल होने के साथ ही उपयोगी भी है। इस आसन के अभ्यास से घुटनों और टखने में खिंचाव आता है। इसके अलावा ये पीठ को भी मजबूत करने में मदद करता है।

सुखासन, स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसे कई रोगों को दूर करने में भी मदद करता है। कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां भी इसके नियमित अभ्यास से ठीक होती देखी गईं हैं। इसके नियमित अभ्यास से चक्र और कुंडलिनी जागरण में भी मदद मिलती है।

सुखासन करने की विधि :

योग मैट पर पीठ को सीधे रखते हुए और पैरों को फैलाकर बैठ जाएं।
दोनों पैरों को बारी-बारी से क्रॉस करते हुए घुटनों से भीतर की तरफ मोड़ें।
घुटने बाहर की तरफ रहें।
पालथी सी मारकर बैठ जाएं।
पैर आराम से रहेंगे। और कोशिश करें कि घुटने जमीन को छूते रहें।
अब पिंडलियों से एक त्रिभुज जैसा बन गया है।
पिंडलियां क्रॉस होकर जांघों के नीचे हैं।
आपके पैरों और पेल्विस के बीच में सुरक्षित जगह होनी चाहिए।
पेल्विस का एरिया अपनी प्राकृतिक स्थिति में रहना चाहिए।
रीढ़ की निचली हड्डी और प्यूबिक बोन फर्श से एक समान दूरी पर रहे।
हथेलियों को या तो अपनी गोद में रख लें। या फिर उन्हें घुटनों पर रख सकते हैं।
हथेलियां ऊपर की तरफ रहें या फिर नीचे की तरफ रहें।
रीढ़ की निचली हड्डी को सीधा करें और कंधों को तानकर रखें।
ध्यान रखें कि कमर का निचला हिस्सा मुड़े नहीं।
निचली पसलियां आगे की तरफ मुड़ जाएंगी।
इस आसन में जब तक आराम से बैठे रहना चाहें, बैठे रह सकते हैं।
सुखासन करते समय रोज अपने पैरों की​ स्थिति को बदलते रहें।

3. उत्तानासन (Uttanasana / Standing Forward Bend Pose)

उत्तानासन मध्यम कठिनाई वाला हठ योग की शैली का आसन है। इसे करने की अवधि 15 से 30 सेकेंड के बीच होनी चाहिए। इसमें किसी दोहराव की आवश्यकता नहीं होती है। उत्तानासन के अभ्यास से हिप्स, हैमस्ट्रिंग, और काव्स पर खिंचाव आता है जबकि घुटने और जांघें मजबूत हो जाती हैं।

इसके अलावा, उत्तानासन के अभ्यास के समय दिमाग दिल से नीचे होता है। ब्रेन में रक्त संचार बढ़ने के कारण ये दिमाग को शांत करता है और एंग्जाइटी से राहत देता है। सिरदर्द और इंसोम्निया की समस्या होने पर भी इसका अभ्यास आराम देता है।

उत्तानासन करने की विधि :

योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथ हिप्स पर रख लें।
सांस को भीतर खींचते हुए घुटनों को मुलायम बनाएं।
कमर को मोड़ते हुए आगे की तरफ झुकें।
शरीर को संतुलित करने की कोशिश करें।
हिप्स और टेलबोन को हल्का सा पीछे की ओर ले जाएं।
धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं और दबाव ऊपरी जांघों पर आने लगेगा।
अपने हाथों से टखने को पीछे की ओर से पकड़ें।
आपके पैर एक-दूसरे के समानांतर रहेंगे।
आपका सीना पैर के ऊपर छूता रहेगा।
सीने की हड्डियों और प्यूबिस के बीच चौड़ा स्पेस रहेगा।
जांघों को भीतर की तरफ दबाएं और शरीर को एड़ी के बल स्थिर बनाए रखें।
सिर को नीचे की तरफ झुकाएं और टांगों के बीच से झांककर देखते रहें।
इसी स्थिति में 15-30 सेकेंड तक स्थिर बने रहें।
जब आप इस स्थिति को छोड़ना चाहें तो पेट और नीचे के अंगों को सिकोड़ें।
सांस को भीतर की ओर खींचें और हाथों को हिप्स पर रखें।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठें और सामान्य होकर खड़े हो जाएं।

4. हलासन (Halasana / Plow Pose)

हलासन, साधारण कठिनाई या बेसिक लेवल का आसन है। इसे हठ योग की शैली का आसन माना जाता है। हलासन का अभ्यास 30 से 60 सेकेंड तक किया जाना चाहिए। इसे करने में किसी किस्म के दोहराव की आवश्यकता नहीं होती है।

हलासन के अभ्यास के समय दोनों टांगों पीछे यानी सिर की तरफ होती हैं। इससे पूरे श्वसन तंत्र को बेहतरीन मसाज मिलती है। ये आसन भावनात्मक चोटों से कमजोर हुई याददाश्त वाले लोगों के लिए रामबाण की तरह है। इसके नियमित अभ्यास से स्ट्रेस जैसी समस्याओं से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।

हलासन करने की विधि :

योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
अपने हाथों को शरीर से सटा लें।
हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी।
सांस भीतर की ओर खींचते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं।
टांगे कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगी।
दबाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा।
टांगों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें।
सीधी टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे ले जाएं।
पैरों के अंगूठे से जमीन को छुएंगे।
हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें।
हथेली नीचे की तरफ रहेगी।
कमर जमीन के समानांतर रहेगी।
इसी स्थिति में एक मिनट तक बने रहें
सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए, टांगों को वापस जमीन पर ले आएं।
आसन को छोड़ते हुए जल्दबाजी न करें।
टांगों को एक समान गति से ही सामान्य स्थिति में वापस लेकर आएं।

5. शवासन (Shavasana / Corpse Pose)

आम धारणा है कि शवासन बेहद सरल आसन है। जबकि हकीकत ये है कि शवासन योग विज्ञान के सबसे कठिन आसनों में से एक है। ये आसन देखने में बेहद सरल लगता है लेकिन इसमें सिर्फ लेटना ही नहीं होता है बल्कि अपने मन की भावनाओं और शरीर की थकान दोनों पर एक साथ नियंत्रण पाना होता है।

शवासन को योगा सेशन के बाद किया जाता है। इसे करने से डीप हीलिंग के साथ ही शरीर को गहरे तक आराम भी मिलता है। इस आसन को तब भी किया जा सकता है जब आप बुरी तरह से थके हों और आपको थोड़ी ही देर में वापस काम पर लौटना हो। शवासन का अभ्यास न सिर्फ आपको ताजगी ​बल्कि ऊर्जा भी देगा।

शवासन करने की विधि :

योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
किसी तकिया या कुशन का इस्तेमाल न करें।
अपनी आंखें बंद कर लें।
दोनों टांगों को ध्यान से अलग-अलग कर लें।
शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो।
पैरों के दोनों अंगूठे साइड की तरफ झुके हुए हों।
हाथ शरीर से थोड़ी दूर हों।
हथेलियों को खुला लेकिन ऊपर की तरफ रखें।
धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से की तरफ ध्यान देना शुरू करें।
शुरुआत पैरों के अंगूठे से करें।
ऐसा करते हुए सांस लेने की गति एकदम धीमी कर दें।
धीरे-धीरे आप गहरे मेडिटेशन में जाने लगेंगे।
आलस या उबासी आने पर सांस लेने की गति तेज कर दें।
शवासन करते हुए कभी भी सोना नहीं चाहिए।
सांस लेने की गति धीमी​ लेकिन गहरी रखें।
आपका फोकस सिर्फ खुद और अपने शरीर पर ही रहेगा।
10-12 मिनट के बाद, आपका शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो जाएगा।
अब एक तरफ को करवट ले लें। दोनों आंखों को बंद रखें।
एक मिनट तक इसी स्थिति में बैठे रहें।
इसके बाद धीरे-धीरे उठें और फिर सुखासन में बैठ जाएं।
गहरी सांसें लें और आंखें खोलने से पहले आसपास के माहौल का जायजा लें।
इसके बाद धीरे-धीरे आंखें खोल दें।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info